जातिवाद से आजाद होता देश का लोकतंत्र

2019 à¤•à¥‡ लोकसभा चुनाव परिणाम कई मायनों में ऐतिहासिक रहे।  à¤‡à¤¸ बार के चुनावों की खास बात यह थी कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव परिणामों पर देश ही नहीं दुनिया भर की नज़रें टिकी थीं। और इन à¤šà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ के  à¤ªà¤°à¤¿à¤£à¤¾à¤®à¥‹à¤‚ ने विश्व में जो आधुनिक भारत की नई à¤›à¤µà¤¿ बन रही थी उस पर अपनी ठोस मोहर लगा दी है कि ये वो भारत है जिसका केवल नेतृत्व ही नहीं बदला बल्कि यहां का जनमानस भी बदला है उसकी सोच भी बदल रही है। ये वो भारत है जो केवल  à¤¬à¤¾à¤¹à¤° से ही नहीं भीतर से भी बदल रहा है। इस भारत का  à¤²à¥‹à¤•à¤¤à¤‚त्र भी बदल रहा है। à¤œà¥‹ लोकतंत्र जातिवाद मजहब समुदाय की बेड़ियों में कैद था उसे विकास ने आज़ाद करा लिया है। à¤‡à¤¸à¤•à¥€ बानगी दिखी नतीज़ों के बाद जब सेंसेक्स ने भी मोदी  à¤¸à¤°à¤•à¤¾à¤° à¤•à¥€ वापसी पर रिकॉर्ड  40000 à¤•à¥€ उछाल दर्ज की।

आज़ाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी गैर कांग्रेस सरकार को दोबारा जनता ने सत्ता की बागडोर सौंप दी हो वो भी पिछली बार से ज्यादा बहुमत के साथ।  à¤”र आज़ाद भारत के इतिहास में कांग्रेस के साथ लगातार दूसरी बार ऐसा हुआ है कि  à¤µà¥‹ संसद में विपक्ष का प्रतिनिधित्व करने लायक संख्याबल भी नहीं जुटा पाई हो। कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का विषय होना चाहिए कि उसका यह प्रदर्शन तो आपातकाल के बाद हुए चुनावों में भी नहीं था। अपने उस सबसे बुरे दौर में भी कांग्रेस ने 189 à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‡à¤‚ जीती थीं। दरअसल इन पांच सालों में और खास तौर पर चुनावों के दौरान देश को अगर किसी ने निराश किया है तो कांग्रेस ने। क्योंकि इन पांच सालों में उसने अपने किसी भी काम से ना तो भाजपा को चुनौती दी और ना ही खुद को लोगों के सामने भाजपा अथवा मोदी के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए। वो अपनी परफॉर्मेंस सुधारने की कोशिश करने के बजाए भाजपा की खराब परफॉर्मेंस का इंतजार करती रही। à¤¶à¤¾à¤¯à¤¦ कांग्रेस ने राजनैतिक पंडितों के इस गणित पर भरोसा कर लिया था कि भाजपा 2014 à¤®à¥‡à¤‚ अपना सर्वश्रेष्ठ दे चुकी है और उसने हर राज्य में इतना अच्छा परफॉर्म कर लिया है कि वो अपने इस प्रदर्शन को किसी भी हालत में दोहरा नहीं सकती। और सत्ताविरोधी लहर के चलते उसकी सीटें हर राज्य में निश्चित ही कम होंगी। इसके अलावा  à¤‰à¤¤à¥à¤¤à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में सपा बसपा का गठजोड़ उसे 15 – 20 à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤‚ तक समेट देगा। यह वाकई निराशाजनक है कि भाजपा की हार में से ही कांग्रेस अपनी जीत के रास्ते खोजती रही।   à¤²à¥‡à¤•à¤¿à¤¨ वो भूल गई कि शॉर्टकटस से लंबे रास्ते तय नहीं होते और ना ही किसी की असफलता किसी की सफलता की वजह बन सकती है। सफलता तो नेक नियत और कठोर परिश्रम से हासिल होती है। इसलिए  à¤¦à¥‡à¤¶ की जनता खास तौर पर उत्तर प्रदेश की जनता को सलाम है कि उसने वोटबैंक की राजनीति करने वाले सभी राजनैतिक दलों को एक सकारात्मक संदेश दे दिया है।  à¤‰à¤¤à¥à¤¤à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ की जनता वाकई बधाई की पात्र है कि जिस राज्य में राजनैतिक दल दलितों यादवों मुसलमानों आदि à¤•à¥‡ वोट प्रतिशत के हिसाब से अपना अपना वोट शेयर आंक कर अपनी सीटों का गणित लगाते थे उस प्रदेश में विकास और अपने काम के बल पर   à¤…केले भाजपा को 50% à¤”र कहीं कहीं तो 60% à¤¤à¤• का à¤µà¥‹à¤Ÿ शेयर मिला। जबकि वोटबैंक की राजनीति करने वाले बुआ बबुआ का गठबंधन जो भाजपा को 20 à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤‚ के अंदर समेट रहा था वो खुद 15पर सिमट गया। यह पहली बार हुआ कि वोटबैंक की राजनीति करने वाले हर दल à¤•à¥‹ पूरे देश ने एक ही जवाब दिया। जो कांग्रेस एनआरसी के मुद्दे पर भाजपा को घेर रही थी उसे असम की जनता ने जवाब दे दिया। जो महबूबा मुफ्ती 370 à¤¹à¤Ÿà¤¾à¤¨à¥‡ पर कश्मीर में भारत के झंडे का अपमान करने की बात करती थीं उन्हें जम्मूकश्मीर की जनता ने जवाब दे दिया। जो ममता प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री मानने से ही इंकार कर रही थीं और उन्हें जेल में डालने की बात करती थीं उन्हें बंगाल की जनता ने जवाब दे दिया है। à¤¨à¥‹à¤Ÿà¤¬à¤¨à¥à¤¦à¥€ और जीएसटी पर सरकार को लगातार घेरने वाले विपक्ष को देश ने जवाब दिया। विश्व के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जीएसटी लागू करने वाली किसी सरकार की सत्ता में वापसी हुई हो। इसलिए भाजपा की इस अभूतपूर्व विजय में मध्यम वर्ग का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। खुद प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि  à¤¦à¥‡à¤¶ के इतिहास में इतना मतदान पहली बार हुआ है। और आंकड़े बताते है कि à¤œà¤¬ जब मध्यम वर्ग ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है  à¤®à¤¤à¤¦à¤¾à¤¨ का प्रतिशत à¤¬à¤¢à¤¼à¤¾ है। दरअसल जो मध्यम वर्ग पहले वोटिंग के प्रति उदासीन रहता था उसने भी इस बार मतदान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। जो राजनैतिक पंडित उज्ज्वला योजना आयुष्मान योजना प्रधानमंत्री आवास योजना शौचालय निर्माण जैसी योजनाओं के कारण केवल दलितों शोषितों वंचितों का जात और मजहब से ऊपर उठकर भाजपा के पक्ष में मतदान करने को ही भाजपा की जीत का एकमात्र कारण मान रहे हैं वो या तो नादानी वश कर रहे हैं या फिर स्वार्थवश ऐसा कह रहे है। 

लेकिन इस सब से परे à¤‡à¤¨ नतीजों ने बहुत से पुराने मिथक तोड़े हैं तो कई नई उम्मीदें भी जगाई हैं। ये वो नतीजे हैं जिन्होंने चुनावों की परिभाषा ही बदल  à¤¦à¥€à¥¤ इन नतीजों ने बता  à¤¦à¤¿à¤¯à¤¾ कि चुनाव सीटों के अंकगणित का खेल नहीं बल्कि मतदाता का अपने नेता के ऊपर विश्वास के रसायन  à¤¸à¥‡ उपजे समीकरण हैं। इसलिए चुनावो में गणित की तर्ज पर दो और दो मिल चार कभी नहीं होते बल्कि दो और दो मिलकर बाईस होंगे या बैक फायर होकर शून्य बन जाएंगे यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जैसे जिस पिछले चुनावों में विपक्ष के लिए मोदी को चाय वाला और नीच कहना भारी पड़ गया तो इस बार चौकीदार चोर है के नारे लगवाना। झूठे नैरेटिव बना कर जो चोर न हो उसे चोर कहना जो भ्रष्ट ना हो उसे भृष्ट कहना जो ईमानदार है उसे बेईमान कहना विपक्ष को किस कदर  à¤­à¤¾à¤°à¥€ पड़ने वाला है इसका अंदाज़ा शायद उन्हें भी नहीं था।

दरसअल स्वार्थ वंशवाद अवसरवाद की राजनीति को जनता अब समझने लगी है। इन चुनाव परिणामों से à¤œà¤¨à¤¤à¤¾ ने जवाब दे दिया है कि à¤œà¥‹ काम करेगा वो ही राज करेगा। à¤²à¥‡à¤•à¤¿à¤¨ विपक्ष की परेशानी यह है कि मोदी ने एक बहुत बड़ी रेखा खींच ली है और अफसोस की बात यह à¤¹à¥ˆ कि उस रेखा की बराबरी करने की ताकत विपक्ष में हो ना हो लेकिन à¤œà¤œà¥à¤¬à¤¾ नहीं है। शायद इसलिए वो लगातार मोदी की बनाई लकीर को छोटी करने में लगा है।

डॉ नीलम महेंद्र