आत्मनिर्भर होने के मायने तलाशने होंगे

आजकल देश में सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर चीन को बॉयकॉट करने कीमुहिम चल रही है। इससे पहले कोविड 19 के परिणामस्वरूप जब देश की अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण के दुष्प्रभाव सामने आने लगे थे तो प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत का मंत्र दिया था। उस समय यह मंत्र देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाने की दृष्टि से उठाया गया एक मजबूत कदम था जो आज  भारत चीन सीमा विवाद के

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आज भी महिलाओं के लिए एक आदर्श हैं रानी लक्ष्मीबाई

आज हम जिस रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धा पुष्प अर्पित कर रहे हैं वो उस वीरता शौर्य साहस और पराक्रम का नाम है जिसने अपने छोटे से जीवन काल में वो मुकाम हासिल किया जिसकी मिसाल आज भी दुर्लभ है। ऐसे तो बहुत लोग होते हैं जिनके जीवन को या फिर जिनकीउपलब्धियों को उनके जीवन काल के बाद

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जीवन चलाने के लिए जीवन को ही दांव पर लगा दिया गया।

विज्ञान के दम पर विकास की कीमत वैसे तो मानव  वायु और जल जैसे जीवनदायिनी एवं अमृतमयी प्राकृतिक संसाधनों के दूषित होने के रूप में चुका ही रहा था किंतु यही विज्ञान उसे कोरोना नामक महामारी भी भेंट स्वरूप देगा इसकी तो उसने स्वप्न में भी कल्पना नहीं की होगी। अब जब मानव प्रयोगशाला का यह जानलेवा उपहार उस पर थोपा जा ही चुका

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कोरोना एक अद्र्श्य सेना के खिलाफ लड़ाई है

क कोरोना से विश्व पर क्या असर हुआ है इसकी बानगी अमरीकी राष्ट्रपति का यह बयान है कि, “विश्व कोरोना वायरस की एक अदृश्य सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।” चीन के वुहान से शुरू होने वाली कोरोना नामक यह बीमारी जो अब महामारी का रूप ले चुकी है आज अकेले चीन ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिएपरेशानी का सबब बन गई है। लेकिन

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कांग्रेस की हताशा है या फिर सुनियोजित रणनीति?

दिल्ली के चुनाव आज देश का सबसे चर्चित मुद्दा है। इसेभारतीय राजनीति का दुर्भाग्य कहें या लोकतंत्र का,कि चुनाव दर चुनाव राजनैतिक दलों द्वारा वोट हासिल करने के लिए वोटरों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देना तो जैसे चुनाव प्रचार का एक आवश्यक हिस्सा बन गया है। कुछ समयपहले तक चुनावों के दौरान चोरी छुपे शराब और साड़ी अथवा कंबल जैसी वस्तुओं के दम पर अपने पक्ष

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कांग्रेस की हताशा है याफिर सुनियोजित रणनीति?

दिल्ली के चुनाव आज देश का सबसे चर्चित मुद्दा है। इसे भारतीय राजनीति का दुर्भाग्य कहें या लोकतंत्र का ,कि चुनाव दर चुनाव राजनैतिक दलों द्वारा वोट हासिल करने के लिए वोटरों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देना तो जैसे चुनाव प्रचार का एक आवश्यक हिस्सा बन गया है। कुछ समयपहले तकचुनावों के दौरानचोरी छुपे शराब और साड़ी अथवा कंबल

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साधारण कार्यकर्त्ता से अध्यक्ष तक का सफ़र

जगत प्रकाश नड्डा, बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष, एक ऐसा व्यक्तित्वजिसने लाइम लाइट से दूर, लो प्रोफाइल रहते हुए विश्व की सबसे बड़ी पार्टीके सर्वोच्च पद तक पहुंचने में सफलता हासिल करने की मिसाल कायम की। वैसे बिहारकी छात्र राजनीति से हिमाचल प्रदेश सरकार में एक मंत्री और  विपक्ष मेंरहते हुए नेता प्रतिपक्ष का पद संभालने से लेकर केंद्र की मोदी सरकार मेंमंत्री बनने और अब पार्टी

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व्यक्तित्व निर्माण मेंसहायक सिद्ध होता है दान

जो हम देते हैं वो ही हम पाते हैं ‘दान के विषय में हम सभी जानते हैं। दान, अर्थात देने का भाव, अर्पण करने की निष्काम भावना। भारत वो देश है जहाँ कर्ण ने अपने अंतिम समय में अपना सोने का दांत ही याचक को देकर, ऋषि दधीचि ने अपनी हड्डियां दान करके और राजा हरिश्चंद्र ने विश्वमित्र को अपना

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तनाव है तो होने दे, इसमेंबुरा क्या है?

 स्ट्रेस यानी तनाव।  पहले इसके बारे में यदा कदा ही सुनने को मिलता था। लेकिन आज भारत समेत सम्पूर्ण विश्व के लगभग सभी देशों में यह किस कदर तेज़ी से फैलता जा रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज हर जगह स्ट्रेस मैनेजमेंट अर्थात तनाव प्रबंधन पर ना सिर्फ अनेक जानकारियाँ उपलब्ध हैं बल्कि

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आपने स्वार्थ के लिये जनता को मुर्ख न बनाएं

जब देश के पढ़े –लिखे बुद्धिजीवी लोग जिनमें कुछ डॉक्टर वकील, शिक्षक,प्रोफेसर, स्कूल कॉलेज के डायरेक्टर, पत्रकार, संपादक जैसे लोग सी ए ए और एन आर सी में अंतर समझे बिना मुस्लिम समुदाय को भृमित करने वाली बातें सोशल मीडिया में कथित सेक्युलरिज्म या फिर गंगा जमुनी तहजीब के नाम पर डालते हैं तो उनकी शिक्षा ही नहीं उनकी नीयत

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